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मकर संक्रांति 2026 कब है? 14 जनवरी को क्यों मनाई जाएगी – जानिए शुभ मुहूर्त और दान का रहस्य

On: January 12, 2026 5:04 AM
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मकर संक्रांति 2026

मकर संक्रांति 2026 — कब है? (तिथि और दिन)

मकर संक्रांति 2026 इस वर्ष बुधवार, 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे और सूर्य का उत्तरायण आरंभ होगा।


शुभ मुहूर्त & पुण्य-काल

  • सूर्य मकर में प्रवेश का क्षण: 14 जनवरी 2026, 3:13 PM (IST)
  • पुण्य-काल (auspicious period): दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक
  • महा-पुण्य काल: 3:13 PM से 4:58 PM (सबसे शुभ समय)

दिये गए इस शुभ समय में स्नान, पूजा और दान करने से विशेष पुण्य और फल मिलता है।


मकर संक्रांति का महत्व — क्यों मनाई जाती है?

सूर्य देव का उत्तरायण होना

मकर संक्रांति उस समय को दर्शाती है जब सूर्य अपनी दक्षिणावर्त गति (दक्षिणायन) समाप्त कर उत्तरायण की ओर बढ़ता है। इसे धार्मिक और सकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है।

उत्तरायण को ब्रह्मा-दिवस कहा जाता है क्योंकि यह समय जप-तप, दान-धर्म और आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ होता है।


पूजा विधि और पारंपरिक संस्कार

पूजन नियम

  1. शुभ मुहूर्त पर उठें और प्रातः स्नान करें।
  2. सूर्य देव को अर्घ्य दें — जल या तिल-गुड़ से।
  3. “ॐ सूर्याय नमः” जैसे मंत्र का जाप करें।
  4. दान-पुण्य करें: अन्न, तिल, गुड़, कपड़े और भोजन देने से पुण्य बढ़ता है।
  5. भोजन में खिचड़ी, तिल के लड्डू और गुड़ की मिठाई शामिल करें।

नारायण सेवा के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान-दान-पूजा संयोजन जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की वृद्धि के लिए शुभ फल देता है।


दान का महत्व (दान-पुण्य)

मकर संक्रांति पर दान करना विशेष रूप से अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है।

श्रद्धा से किये जाने वाले दान

  • अन्न दान: खाद्य सामग्री देना
  • खाद्य दान: तिल-गुड़, khichdi आदि
  • कपड़े दान: गर्म कपड़े देना
  • धर्मार्थ दान: जरूरतमंदों को सहायता करना

दान के फल से जीवन में मान-यश, स्वास्थ्य, सुख-शांति और समृद्धि आती है।


मकर संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व

मकर संक्रांति केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि भारत के किसान-आधारित समाज में कृषि, मौसम और जीवन की जड़ों से जुड़ा त्योहार है।

यह त्योहार खेतों की कटाई और उगाई का उत्सव, गरम दिनों की शुरुआत, और नई ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है।


🇮🇳 भारत में विविध राज्य-वार परंपराएं

भारत में यह त्योहार अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है:

उत्तर भारत

  • गंगा में पवित्र स्नान
  • खिचड़ी और भोजन वितरण

गुजरात

  • रंग-बिरंगी पतंगों का उत्सव
  • “उत्तरायण” पतंग महोत्सव

तमिलनाडु

  • पोंगल के रूप में चार दिनों का उत्सव

उत्तर-पूर्व

  • असम में माघ बिहू
  • बंगाल में पौष संक्रांति

हर जगह खाना, भजन-कीर्तन, दान-दान के माध्यम से खुशी और समुदाय का जश्न मनाया जाता है।


मकर संक्रांति में क्यों खिचड़ी-तिल-गुड़?

खिचड़ी, तिल और गुड़ का उपयोग न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि वैज्ञानिक और पौष्टिक रूप से भी स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त होता है, विशेषकर सर्दियों में।

  • खिचड़ी: पौष्टिक और शुद्ध भोजन
  • तिल-गुड़: गर्मी, ऊर्जा और मिठास का प्रतीक

इनका दान और भोजन दोनों ही शुभ फल देते हैं।

मकर संक्रांति 202614 जनवरी होने के कारण — यह एक पावन पर्व है जो:

✔ सूर्य देव के उत्तरायण की शुरुआत को दर्शाता है
✔ पूजा-दान के लिए अत्यंत शुभ दिन है
✔ सामूहिक उत्सव, पतंग-उड़ान, भोजन और समुदाय-एकता को जोड़ता है

इस दिन किया गया दान, पूजा और शुभ कर्म आपके जीवन में आध्यात्मिक एवं सामाजिक समृद्धि लाता है।

Roshni verma

Roshni Verma writes for Hindi News 99, focusing on entertainment, Lifestyle, and breaking news. She brings readers timely, engaging, and reliable updates.

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