Amazon layoffs 2026 साल की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट छंटनी की खबरों में से एक बन चुकी है। विश्व की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों में से एक Amazon ने जनवरी 2026 में फिर से बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की योजना का खुलासा किया है, जिसमें लगभग 16,000 कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में हैं और यह कदम कंपनी के बड़े पुनर्गठन अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है।
यह वह दौर है जब तकनीक कंपनियां तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही हैं – लेकिन Amazon की यह छंटनी सिर्फ संख्या नहीं है; इसके पीछे कई संभावित कारण और इसकी वैश्विक तथा भारतीय कार्यबल पर असर के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
Amazon layoffs 2026 – मुख्य बिंदु
- Amazon अगले चरण में लगभग 16,000 नौकरियों में कटौती कर सकता है।
- यह कदम 2025 में शुरू हुई 14,000 नौकरियों की छंटनी के बाद लिया जा रहा है, और कुल मिलाकर यह संख्या 30,000 तक पहुंच सकती है।
- Amazon Web Services (AWS), Prime Video, रीटेल ऑपरेशंस और Human Resources विभाग जैसी टीमों पर इसका असर सबसे ज्यादा हो सकता है।
- भारतीय टीमों विशेषकर बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे शहरों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए चिंता बढ़ रही है।
Amazon layoffs 2026 – यह क्यों हो रहा है?
छंटनी के पीछे आधिकारिक रूप से कंपनी ने कई वजहें बताई हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
1. संरचनात्मक बदलाव और संगठन का पुनर्गठन
कंपनी का मानना है कि इसके कॉर्पोरेट ढांचे में “ब्यूरोक्रेसी” बढ़ चुकी है और इसे घटाकर अधिक चुस्त और तेज़ निर्णय लेने वाली इकाई बनाना आवश्यक है। अमेज़न के शीर्ष नेतृत्व का कहना है कि यह छंटनी AI-Driven कारण नहीं है, बल्कि संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा है।
2. AI और तकनीकी बदलाव का प्रभाव
हालाँकि कंपनी इसे मुख्य कारण नहीं मानती, फिर भी तकनीक में तेज़ी से AI और ऑटोमेशन के इस्तेमाल से कुछ कार्यों में मानव श्रम की आवश्यकता घट रही है। कई विश्लेषक इसे लंबी अवधि की “वर्कफ़ोर्स ट्रांसफ़ॉर्मेशन” का संकेत मानते हैं।
3. विश्वव्यापी आर्थिक चुनौतियाँ
ग्लोबल अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ रही है और बड़े तकनीकी संगठनों को लागत प्रबंधन पर ज़्यादा ध्यान देना पड़ रहा है। इस आर्थिक दबाव का प्रभाव कर्मचारियों पर भी दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक बड़ा ‘कर्मचारी संख्या संतुलन’ प्रयास है।
🇮🇳 Amazon layoffs 2026 – भारत और कर्मचारियों पर असर
भारत जैसे देशों में Amazon के भारी कार्यबल के साथ इस छंटनी से चिंता बढ़ी है:
भारतीय टीमों जैसे AWS, Prime Video और People Experience & Technology जैसे विभागों में कार्यरत कर्मचारियों पर असर का अनुमान लगाया जा रहा है।
चेन्नई में IT यूनियन ने छंटनी पर तीखा विरोध जताया है और इसे “कर्मचारियों के खिलाफ गैर-कानूनी और अनुचित कदम” बताया है।
भारतीय कर्मचारियों की संख्या कंपनी में तेजी से बढ़ी है और इस छंटनी से घरेलू तकनीकी बाजार में नौकरी की अनिश्चितता भी बढ़ सकती है।
शेयर बाजार और निवेशकों की प्रतिक्रिया
Amazon के इस फैसले के बाद कंपनी के शेयरों में हल्की गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशक इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह कदम दीर्घकालिक विकास रणनीति के अनुरूप है या सिर्फ अल्पकालिक लागत कटौती का प्रयास।
एक प्रमुख विश्लेषण में बताया गया है कि Amazon AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनी एक बड़े तकनीकी बदलाव की दिशा में अग्रसर है।
विशेषज्ञ की राय: यह केवल छंटनी नहीं, रणनीति है
विश्लेषकों का मानना है कि बड़े तकनीकी संगठन बाजार की अनिश्चितताओं, AI के विस्तार और कॉर्पोरेट भार को संतुलित करने की कोशिश में निरंतर परिवर्तन कर रहे हैं। Amazon जैसी कंपनी के लिए यह केवल कर्मचारियों की कटौती नहीं है; यह एक दीर्घकालिक रणनीति है जिसमें लागत, क्षमता, तकनीकी दक्षता और तेजी शामिल हैं।
यहां विशेषज्ञ बताते हैं कि भविष्य के लिए कर्मचारी कौशल (skills) में बदलाव, AI का ज्ञान और अनुकूलन क्षमता अब पहले से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
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Amazon layoffs 2026 सिर्फ एक संख्या या खबर नहीं है। यह आज की तकनीकी दुनिया में एक बड़े बदलाव का प्रतीक भी है। जबकि Amazon उच्च तकनीकी निवेश की दिशा में अग्रसर है, वहीं इसके कार्यबल में ऐसा बदलाव नए अवसर और चुनौतियों दोनों को जन्म देगा।
यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में कौशल विकास, AI-समझ और नई क्षमताएँ कार्यबल की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होंगी।












