क्रिकेट बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश लाइफ - साइंस

Greenland पर क्यों बढ़ा वैश्विक तनाव?

On: January 5, 2026 11:41 AM
Follow Us:
Greenland

हाल के दिनों में Greenland एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है। दरअसल, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। इस बयान के बाद Greenland की सरकार और डेनमार्क की प्रतिक्रिया ने मुद्दे को और गंभीर बना दिया।

हालांकि Greenland भौगोलिक रूप से बर्फ से ढका क्षेत्र है, लेकिन रणनीतिक रूप से इसकी अहमियत बेहद ज्यादा है। यही वजह है कि यह द्वीप दुनिया की बड़ी शक्तियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

Greenland की रणनीतिक अहमियत

Greenland दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और यह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। इसके अलावा, यह Arctic क्षेत्र में स्थित होने के कारण वैश्विक सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, Greenland में मौजूद दुर्लभ खनिज और प्राकृतिक संसाधन भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए अहम साबित हो सकते हैं। वहीं, जलवायु परिवर्तन के चलते यहां नई समुद्री व्यापारिक राहें भी खुल रही हैं।

🇺🇸 ट्रंप के बयान से क्यों मचा विवाद?

डोनाल्ड ट्रंप पहले भी Greenland को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। इस बार उन्होंने फिर से संकेत दिया कि Greenland अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है। इसी बयान को वहां की सरकार ने अपनी संप्रभुता पर खतरे के रूप में देखा।

इसके जवाब में Greenland के प्रधानमंत्री Jens-Frederik Nielsen ने साफ कहा कि “अब बहुत हो चुका है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि Greenland कोई सौदे की चीज नहीं है, बल्कि वहां रहने वाले लोगों का घर है।

🇩🇰 डेनमार्क और यूरोप की प्रतिक्रिया

इस बीच डेनमार्क सरकार ने भी ट्रंप के बयान की आलोचना की है। डेनमार्क का कहना है कि किसी भी क्षेत्र के भविष्य का फैसला उसकी जनता करती है, न कि बाहरी ताकतें।

इसके साथ ही कई यूरोपीय देशों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि Arctic क्षेत्र में इस तरह के बयान तनाव को और बढ़ा सकते हैं।

वैश्विक राजनीति पर असर

Greenland को लेकर यह विवाद केवल एक देश तक सीमित नहीं है। इसलिए इसका असर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में तनाव देखने को मिल सकता है।

इसके अलावा, Arctic सुरक्षा नीति और संसाधन राजनीति भी इस बहस से प्रभावित हो सकती है।

कुल मिलाकर, Greenland अब सिर्फ बर्फीला द्वीप नहीं रह गया है। बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री Jens-Frederik Nielsen का बयान यह साफ दर्शाता है कि Greenland अपनी पहचान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा। आने वाले समय में यह मुद्दा और भी सुर्खियों में रह सकता है।

Roshni verma

Roshni Verma writes for Hindi News 99, focusing on entertainment, Lifestyle, and breaking news. She brings readers timely, engaging, and reliable updates.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

 

Leave a Comment