India-EU FTA Deal: 18 साल बाद भारत-EU का ऐतिहासिक व्यापार समझौता

On: January 27, 2026 11:22 AM
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India-EU FTA Deal

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत आखिरकार अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। India-EU FTA Deal को अब औपचारिक रूप से “Mother of All Trade Deals” कहा जा रहा है। लगभग 18 वर्षों की चर्चा, मतभेद और रणनीतिक बातचीत के बाद यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक नया अध्याय जोड़ता है।

यह समझौता सिर्फ दो अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारत की आर्थिक स्थिरता, निर्यात क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव पर भी पड़ने वाला है।


India-EU FTA Deal क्या है?

FTA यानी Free Trade Agreement का उद्देश्य दो देशों या समूहों के बीच व्यापार को आसान बनाना होता है। इस समझौते के तहत:

  • आयात-निर्यात पर लगने वाले टैरिफ (शुल्क) कम या खत्म किए जाते हैं
  • निवेश के लिए नए अवसर खोले जाते हैं
  • सेवाओं, तकनीक और श्रम मोबिलिटी को बढ़ावा मिलता है

भारत-EU FTA के तहत दोनों पक्षों ने अधिकतर वस्तुओं और सेवाओं पर व्यापार बाधाएँ घटाने पर सहमति जताई है।


18 साल क्यों लगे इस डील में?

India-EU FTA Deal की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन कई कारणों से यह बार-बार अटकती रही:

  • भारत की कृषि सुरक्षा को लेकर चिंताएँ
  • EU की पर्यावरण और श्रम मानक से जुड़ी शर्तें
  • ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी सेक्टर पर मतभेद

अब वैश्विक आर्थिक हालात, सप्लाई-चेन में बदलाव और भू-राजनीतिक दबावों ने दोनों पक्षों को समझौते के लिए करीब ला दिया।


इस डील से भारत को क्या फायदे होंगे?

1. निर्यात में बड़ा उछाल

EU भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। FTA के बाद भारतीय उत्पादों को यूरोप में कम टैक्स पर प्रवेश मिलेगा, जिससे:

  • टेक्सटाइल
  • फार्मा
  • आईटी और सर्विस सेक्टर
  • इंजीनियरिंग गुड्स

जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ होगा।


2. निवेश और रोजगार

India-EU FTA Deal से यूरोपीय कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ सकता है, खासकर:

  • मैन्युफैक्चरिंग
  • ग्रीन एनर्जी
  • इलेक्ट्रिक व्हीकल्स
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।


3. उपभोक्ताओं को सस्ते उत्पाद

यूरोप से आने वाले कई उत्पाद, जैसे:

  • कारें
  • मशीनरी
  • मेडिकल उपकरण

अब पहले से कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को फायदा मिलेगा।


क्या कोई नुकसान भी है?

हर बड़े समझौते की तरह India-EU FTA Deal के कुछ चुनौतियाँ भी हैं:

  • घरेलू उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है
  • छोटे किसान और MSME सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है
  • विदेशी उत्पादों की अधिक उपलब्धता से स्थानीय कंपनियों की मार्जिन घट सकती है

इसीलिए सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों के लिए फेज़-वाइज लागू करने की रणनीति अपनाई है।


वैश्विक राजनीति में India-EU FTA Deal का महत्व

आज की दुनिया में व्यापार केवल आर्थिक विषय नहीं रहा, बल्कि यह रणनीतिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है।

  • अमेरिका-चीन ट्रेड तनाव
  • वैश्विक सप्लाई-चेन में बदलाव
  • उभरते बाजारों की भूमिका

इन सबके बीच भारत-EU का यह समझौता भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करता है।

भारत के अन्य व्यापार समझौतों पर पढ़ें: India new trade deals, 50% ट्रंप टैरिफ को झटका!


विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर India-EU FTA Deal को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह अगले 5–10 वर्षों में भारत की GDP वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
हालाँकि, इसके लिए सरकार को:

  • घरेलू उद्योगों की सुरक्षा
  • स्किल डेवलपमेंट
  • नीति स्थिरता

पर बराबर ध्यान देना होगा।


India-EU FTA Deal भारत के लिए एक बड़ा अवसर है, लेकिन यह पूरी तरह से win-win तभी साबित होगा जब इसके लाभ आम उद्योग, किसान और उपभोक्ता तक पहुँचें।
यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में एक मजबूत खिलाड़ी बना सकता है — बशर्ते इसे संतुलन और दूरदृष्टि के साथ लागू किया जाए।

divya

Divya writes for Hindi News 99, focusing on World News, and technology. She provides readers with timely and reliable updates in a simple, engaging style.

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