आईपीएल ने बदली भारतीय क्रिकेट की तस्वीर
मुंबई: 2009 टी20 विश्व कप में भारत के सेमीफाइनल से पहले बाहर होने के बाद उस समय के मुख्य कोच गैरी कर्स्टन ने कहा था कि दक्षिण अफ्रीका में खेले गए कठिन आईपीएल के कारण भारतीय खिलाड़ी थक गए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर क्रिकेट कैलेंडर इतना व्यस्त रहा तो खिलाड़ियों को भविष्य में विश्व टी20 से पहले आईपीएल छोड़ना पड़ सकता है।
उस समय भारतीय टीम लगातार यात्राओं में थी, इसलिए कर्स्टन की बात पूरी तरह गलत नहीं थी। लेकिन इससे उन लोगों को भी मौका मिला जो हर हार के लिए आईपीएल को जिम्मेदार ठहराते थे।
अब बदल चुकी है सोच
करीब 17 साल बाद आईपीएल को लेकर लोगों की सोच पूरी तरह बदल गई है। इसका बड़ा कारण यह है कि भारत ने 2024 और 2026 के टी20 विश्व कप लगातार जीते हैं।
आज टी20 क्रिकेट में आईपीएल भारत की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।
हाल ही में विश्व कप जीतने वाली टीम के अधिकांश खिलाड़ी आईपीएल पीढ़ी से हैं — यानी वे खिलाड़ी जो आईपीएल देखते और खेलते हुए बड़े हुए हैं। कप्तान सूर्यकुमार यादव से लेकर कई खिलाड़ी टी20 विशेषज्ञ बन चुके हैं।
भारत ने टूर्नामेंट में तीन बार 250 से ज्यादा रन बनाए, जिनमें से दो स्कोर नॉकआउट मैचों में थे।
आईपीएल ने खिलाड़ियों को दबाव झेलना सिखाया
भारत के पूर्व लेग स्पिनर साईराज बहुतुले का कहना है कि आईपीएल ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच की दूरी कम कर दी है।
उनके अनुसार:
- खिलाड़ी अब दबाव में खेलना जानते हैं।
- वे परिस्थितियों के अनुसार जल्दी ढल जाते हैं।
- पहले की तुलना में अब खिलाड़ी दबाव में और बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
बल्लेबाजों की सोच भी बदली
बहुतुले कहते हैं कि आईपीएल के बाद बल्लेबाजों की सोच पूरी तरह बदल गई है।
अब बल्लेबाज:
- सुरक्षित खेलने की बजाय आक्रामक खेलते हैं
- गेंदबाज से डरते नहीं हैं
- गेंद देखकर सीधे हमला करते हैं
ओपनर जानते हैं कि पावरप्ले में तेजी से रन बनाना जरूरी है और कब जोखिम लेना है।
गेंदबाज भी हुए ज्यादा इनोवेटिव
आईपीएल में अक्सर 200 से ज्यादा स्कोर बनने से गेंदबाजों के लिए चुनौती बढ़ी है। लेकिन इससे वे नई रणनीतियाँ और नई गेंदबाजी तकनीक अपनाने लगे हैं।
उदाहरण के तौर पर अर्शदीप सिंह की वाइड यॉर्कर रणनीति।
भारतीय खिलाड़ी अब दूसरों को सिखा रहे हैं
बहुतुले के अनुसार अब विदेशी खिलाड़ी भी भारतीय खिलाड़ियों से सीख रहे हैं।
अभिषेक शर्मा और ईशान किशन जैसे खिलाड़ी बिना डर के बल्लेबाजी करते हैं और बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ खेलते हैं।
अगर कोई खिलाड़ी आईपीएल में हजारों दर्शकों के सामने खेल चुका है, तो अंतरराष्ट्रीय मैच की भीड़ उसे डराती नहीं है।
आईपीएल खिलाड़ियों का चरित्र बनाता है
भारत के पूर्व बल्लेबाज प्रवीण आमरे का मानना है कि आईपीएल खिलाड़ियों के स्वभाव और आत्मविश्वास को मजबूत बनाता है।
उनके अनुसार:
- हर मैच में जीत का दबाव होता है
- इससे खिलाड़ियों का मानसिक स्तर मजबूत होता है
- आईपीएल चैंपियन खिलाड़ी तैयार करता है
आईपीएल बना सबसे बड़ा टैलेंट पूल
पंजाब किंग्स के सीईओ सतीश मेनन के अनुसार आईपीएल दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट प्रतिभा मंच बन चुका है।
यहां युवा खिलाड़ियों को शीर्ष अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलता है, जिससे वे बिना डर के राष्ट्रीय टीम के लिए खेल पाते हैं।
टी20 क्रिकेट की मानसिकता बदली
गुजरात टाइटंस के सीओओ अरविंदर सिंह बताते हैं कि 2008 में आईपीएल शुरू हुआ था तब:
- 160 रन जीत के लिए काफी माने जाते थे
- 175 बड़ा स्कोर होता था
- 8 रन प्रति ओवर भी मुश्किल लगते थे
लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
आज:
- 200+ स्कोर सामान्य हो गए हैं
- 225 का लक्ष्य भी पीछा किया जा सकता है
- आखिरी चार ओवर में 60 रन बनाना भी संभव माना जाता है
आईपीएल ने बदली भारतीय टीम की मानसिकता
खिलाड़ियों का आत्मविश्वास इसलिए बढ़ा है क्योंकि वे आईपीएल में ऐसे हालात कई बार झेल चुके हैं।
इसलिए अब भारतीय टीम स्कोरबोर्ड के दबाव में नहीं टूटती।
74 मैच, 10 टीमें और दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ी — इस वजह से आईपीएल का मुकाबला बहुत कठिन होता है। कई बार किसी आईपीएल टीम की गेंदबाजी अंतरराष्ट्रीय टीम से भी मजबूत होती है।
इसी कारण आज सफेद गेंद क्रिकेट में भारत दुनिया से आगे दिखाई देता है।















