एयरस्पेस में पिछले 18 महीने में 947 बार दूसरे देशों के लड़ाकू विमान घुसे, इनमें ज्यादातर चीन की सेना के थे

Japan Air Force News Updates: (JASDF) Intercepted Chinese Military Aircraft Including Other Countries Warplanes 947 Times in 18 Months

एयरस्पेस में पिछले 18 महीने में 947 बार दूसरे देशों के लड़ाकू विमान घुसे, इनमें ज्यादातर चीन की सेना के थे

यह फोटो जापान के बेड़े में शामिल होने वाले एफ-35 प्लेन्स के साथ वहां के एयरफोर्स के जवानों की है। चीन से खतरे को देखते हुए जापान अपने बेड़े में नए फाइटर जेट्स शामिल कर रहा है।-फाइल

  • सेनकाकू आइलैंड के पास चीन के साथ ही रुस के फाइटर जेट भी जापान के एयर स्पेस में घुस आते हैं
  • चीन का कहना है कि सेनकाकू आइलैंड हमारे देश का हिस्सा है, यहां हमारे जेट उड़ते हैं तो यह इंटरनेशनल कानून के खिलाफ नहीं

दूसरे देशों के लड़ाकू विमान जापान एयरफोर्स की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। हर दिन यहां की एयर स्पेस में करीब दो बार दूसरे देशों के फाइटर प्लेन घुस आते हैं। सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2019 से लेकर इस साल 31 मार्च के बीच ऐसा 947 बार हुआ है। ज्यादातर चीन के फाइटर्स जेट ने ऐसा किया। कई बार रूस के फाइटर जेट भी यहां घुस आते हैं।

जापान के फाइटर पायलट लेफ्टीनेंट कर्नल तकमिची शिरोटा के मुताबिक, पिछले एक दशक में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। खास तौर पर देश के दक्षिण पश्चिम एयर जोन में ऐसा ज्यादा हुआ है। जापान के एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स ने यहीं पर सबसे अधिक दूसरे प्लेन्स को इंटरसेप्ट किया है और उन्हें वापस खदेड़ा है।

सेनकाकू आइलैंड काे लेकर है चीन-जापान में विवाद

जापान के दक्षिण पश्चिम इलाके में ही सेनकाकू या दायायू आइलैंड है। यही चीन के साथ जापान के विवाद की वजह है। फिलहाल यहां जापान का कब्जा है,लेकिन चीन पर इस पर अपना दावा करता है। यह दक्षिण चीन सागर के पास है। इस आइलैंड के पास 12 मील का इंटरनेशनल एयर रूट है। हालांकि, चीन इसे नहीं मानता और अक्सर जापान के एयर स्पेस में घुस आता है। चीन के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन के फाइटर जेट्स ने पिछले 18 महीने में 675 बार अंतरराष्ट्रीय नियमों को तोड़ा है। इसे देखते हुए जापानी एयरफोर्स को हमेशा अलर्ट रहना होता है।

चीन नियमों को तोड़ने से इनकार करता है

चीन का कहना है कि उसने सेनकाकू आइलैंड के पास कोई नियम नहीं तोड़ा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान के मुताबिक, यह आइलैंड शुरुआत से चीन का हिस्सा रहा है। हम अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए अटल हैं। यहां पर हमारी सेना के प्लेन्स अपनी रूटीन उड़ाने भरते हैं। यह किसी भी तरह से इंटरनेशनल कानून का उल्लंघन नहीं है। इससे किसी देश को कोई खतरा नहीं है।

चीन के पास जापान से छह गुना ज्यादा फाइटर जेट

चीन के पास जापान से छह गुना ज्यादा फाइटर जेट हैं। यह लगातार अपनी नेवी और एयरफोर्स के बेड़े में नए जेट्स शामिल कर रहा है। ऐसे में जापान पर खतरा बढ़ जाता है। वहीं दूसरी तरफ, जापानी एयरफोर्स के बेड़े में एफ-15 जे जेट ही अहम है। हर बार इसके एयर स्पेस में किसी अनजान प्लेन के घुसने पर कम से कम चार ऐसे जेट भेजे जाते हैं। ज्यादा उड़ान भरने की वजह से ये पुराने होते जा रहे हैं।

जापान पर है समुद्र और आसमान से हमले का खतरा

जापान एक ऐसा देश है जो चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। इसलिए, यहां पर या तो समुद्र के रास्ते या फिर हवाई हमले किए जा सकते हैं। देश के लोगों की रक्षा के लिए एयरफोर्स का मजबूत रहना जरूरी है। इसे देखते हुए इसने, अब स्टील्थ एफ-3 और अमेरिका में डिजाइन किए गए एफ-35 फाइटर जेट को अपने बेड़े में शामिल करना शुरू किया है। इसे अमेरिका से कुछ एफ-35 फाइटर जेट मिल भी चुके हैं। दक्षिण चीन सागर में चीन के खतरे को देखते हुए यह अपनी नेवी को भी मजबूत बना रहा है।


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