मुंबई — Mumbai Mayor Election 2026 में आज एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता भास्कर जाधव ने कहा है कि एकनाथ शिंदे को BMC महापौर चुनाव में उद्धव ठाकरे के पक्ष का समर्थन करना चाहिए, जिससे उद्धव के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को महापौर का पद मिल सके।
इस महत्वपूर्ण बयान से यह संकेत मिलता है कि 2026 के Brihanmumbai Municipal Corporation (BMC) नतीजों के बाद राजनीतिक समीकरण कितने पेचीदा और बदलते हुए नजर आ रहे हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि – BMC चुनाव और स्थितियों की जटिलता
15 जनवरी को सम्पन्न हुई BMC चुनाव 2026 में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। चुनाव परिणामों के मुताबिक्—
• भाजपा ने 89 में से सबसे ज्यादा सीटें जीतीं,
• शिवसेना (शिंदे गुट) ने 29 सीटें हासिल कीं,
• वहीं शिवसेना (UBT) ने 65 सीटें जीतीं।
इस तरह, भाजपा और शिंदे गुट को मिला कर वे कुल 118 सीटें बनाते हैं, जो बहुमत (114) से ऊपर हैं, लेकिन भारी राजनीतिक दबाव और गठबंधन की संभावनाओं ने इस रेखा को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
भास्कर जाधव का बयान: राजनीति का बड़ा मोड़?
भास्कर जाधव ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर एकनाथ शिंदे — जो कि शिवसेना के विभाजित गुट के नेता हैं — उद्धव ठाकरे के पक्ष में वोट देते हैं और उनका समर्थन करते हैं, तो यह बाळासाहेब ठाकरे की 100वीं जयंती वर्ष में उनके आदर्शों को सच्चा सम्मान देना होगा।
उनका यह बयान यह भी बताता है कि UBT गुट महापौर के लिए भाजपा की प्राथमिकता वाले उम्मीदवार के बजाय स्वयं के उम्मीदवार को जीतते हुए देखना चाहता है।
विश्लेषण की नजर से देखें तो यह कदम न केवल सत्ता के फेर बदल को प्रभावित करेगा, बल्कि शिंदे और ठाकरे गुट के बीच गठबंधन की राजनीति में एक नई ऊर्जा और संभावित अनिश्चितता भी लाएगा।
विश्लेषण: गठबंधन या टकराव?
राजनीतिक विशेषज्ञों और विश्लेषकों की राय में Mumbai Mayor Election 2026 एक ऐसा मोर्चा बनता जा रहा है जहाँ—
गठबंधन की संभावना
• अगर शिंदे पक्ष निकल रहा समर्थन उद्धव गुट को दे देता है, तो यह गठबंधन UBT को महापौर पद के लिए मजबूत स्थिति में ला सकता है।
• यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक महसूस होने वाले विभाजन को पाटने जैसा भी हो सकता है।
भाजपा का खेल
• भाजपा ने BMC में सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद फ्रंटफुट पर महापौर के पद को लेकर निर्णय नहीं लिया है।
• कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि भाजपा इस चुनाव का इस्तेमाल राजधानी राजनीति में अपनी प्रासंगिकता साबित करने के लिए कर सकती है।
राजनीतिक रणनीति और जनता की धारणा
जनता के मन में चल रही धारणा यह है कि महापौर पद सिर्फ एक ceremonial भूमिका नहीं है, बल्कि यह बड़े राजनीतिक संदेश और सत्ता स्थिरता का प्रतिबिंब है। इस वजह से दलों की रणनीतियाँ अधिक जटिल और रणनीतिक हो गई हैं।
उद्धव ठाकरे का नजरिया और प्रतिक्रिया
उद्धव ठाकरे ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि उनका सपना है कि मुंबई में शिवसेना (UBT) का महापौर हो, और “अगर भगवान मर्जी करे” तो ऐसा संभव है। उनका यह बयान संकेत देता है कि वे सत्ता के लिए संघर्ष में दृढ़ हैं, और अपने गुट की इच्छा शक्ति को उजागर कर रहे हैं।
इसके अलावा, कुछ बयान यह भी दिखाते हैं कि एकनाथ शिंदे चाहते हैं कि महापौर पद उनके गुट या Mahayuti गठबंधन के हिस्से के रूप में किसी सहयोगी को मिले, बजाय सिर्फ भाजपा के निर्णय का अनुसरण करने के।
राजनीतिक संभावनाएँ और आगे की दिशा
मुंबई महापौर चुनाव 2026 के उपरांत की परिस्थितियाँ निरंतर बदल रही हैं:
✔ संभव गठबंधन में बदलाव
✔ निकट भविष्य में लॉटरी या मतदान प्रक्रिया का निर्णय (महापौर पद के लिए)
✔ राजनीतिक बयान और सार्वजनिक प्रतिक्रिया में वृद्धि
इन सबका मतलब है कि सिर्फ सीटों की संख्या नहीं, बल्कि नेताओं के निर्णय और गठजोड़ Mumbai Mayor Election 2026 के परिणाम को निर्णायक रूप से प्रभावित करेंगे।
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