अंतरिक्ष से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। NASA अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (International Space Station – ISS) पर मौजूद अपने क्रू मेंबर्स की जल्द पृथ्वी वापसी (Early Return) पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह फैसला उस समय चर्चा में आया जब एक मेडिकल इश्यू के चलते तय स्पेसवॉक (Spacewalk) को फिलहाल टाल दिया गया।
क्या है पूरा मामला? (What We Know So Far)
NASA के अनुसार, ISS पर मौजूद एक अंतरिक्ष यात्री की तबीयत को लेकर एहतियातन कदम उठाए गए हैं।
- मेडिकल स्थिति को स्थिर बताया गया है
- किसी तरह का तत्काल खतरा नहीं
- लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्पेसवॉक डिले कर दी गई
NASA ने साफ किया है कि यह फैसला क्रू सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत लिया गया है।

स्पेसवॉक क्यों टाली गई?
स्पेसवॉक ISS के रखरखाव और तकनीकी अपग्रेड के लिए बेहद जरूरी होती है।
हालांकि, NASA ने कहा कि:
- मेडिकल स्थिति का पूरी तरह मूल्यांकन जरूरी था
- किसी भी तरह का रिस्क नहीं लिया जा सकता
- इसी वजह से स्पेसवॉक को री-शेड्यूल किया जाएगा
क्या क्रू की जल्द वापसी हो सकती है?
NASA इस बात पर मंथन कर रहा है कि:
- क्या संबंधित क्रू मेंबर को जल्दी पृथ्वी पर लौटाया जाए
- या मेडिकल मॉनिटरिंग के साथ मिशन जारी रखा जाए
अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन सभी विकल्प खुले हैं।
ISS पर क्रू की सेफ्टी कितनी अहम?
ISS पर हर अंतरिक्ष यात्री की सेहत पर:
- 24×7 मेडिकल मॉनिटरिंग
- ग्राउंड कंट्रोल से लगातार संपर्क
- इमरजेंसी रिटर्न प्लान पहले से तैयार
NASA के मुताबिक, क्रू की जान से बढ़कर कोई मिशन नहीं।
NASA का आधिकारिक रुख
NASA ने बयान में कहा कि:
“स्थिति पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। सभी फैसले अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।”
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के बारे में पूरी जानकारी
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी International Space Station (ISS) दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे महंगी अंतरिक्ष प्रयोगशाला है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में लगातार चक्कर लगाती रहती है। यह इंसान द्वारा बनाया गया ऐसा ढांचा है, जहां अंतरिक्ष यात्री महीनों तक रहकर रिसर्च करते हैं।
ISS क्या है और क्यों बनाया गया?
ISS को इस उद्देश्य से बनाया गया ताकि:
- अंतरिक्ष में लंबे समय तक मानव जीवन की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सके
- जीरो ग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग किए जा सकें
- भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशन की तैयारी हो सके
यह अंतरिक्ष में एक चलता-फिरता लैब है, जहां हर दिन नई रिसर्च होती है।
कौन-कौन से देश हैं ISS का हिस्सा?
ISS एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नतीजा है। इसमें ये एजेंसियां शामिल हैं:
- 🇺🇸 NASA (अमेरिका)
- 🇷🇺 Roscosmos (रूस)
- 🇪🇺 ESA (यूरोप)
- 🇯🇵 JAXA (जापान)
- 🇨🇦 CSA (कनाडा)
इन सभी देशों के अंतरिक्ष यात्री समय-समय पर ISS पर मिशन करते हैं।
ISS कितनी ऊंचाई पर है और कितनी तेजी से चलता है?
- पृथ्वी से ऊंचाई: लगभग 400 किलोमीटर
- स्पीड: करीब 28,000 किमी/घंटा
- एक चक्कर: 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर
- रोज़: लगभग 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त
ISS पर अंतरिक्ष यात्री क्या करते हैं?
ISS पर मौजूद क्रू:
- मेडिकल और बायोलॉजिकल एक्सपेरिमेंट
- मानव शरीर पर माइक्रोग्रैविटी का असर
- स्टेशन की मरम्मत और अपग्रेड
- स्पेसवॉक (EVA) करके बाहरी काम
यही वजह है कि क्रू की सेहत सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।
मेडिकल इश्यू क्यों होता है गंभीर?
- डॉक्टर मौजूद नहीं होते
- इलाज के संसाधन सीमित होते हैं
- इमरजेंसी में अर्ली रिटर्न ही आखिरी विकल्प होता है
इसलिए अगर किसी क्रू मेंबर को मेडिकल दिक्कत होती है, तो NASA जैसे एजेंसियां स्पेसवॉक रद्द, मिशन रोके जाने या तुरंत वापसी पर विचार करती हैं।
इमरजेंसी में अंतरिक्ष यात्री कैसे लौटते हैं?
ISS पर हमेशा:
- Soyuz या Crew Dragon जैसे रिटर्न व्हीकल तैयार रहते हैं
- ताकि जरूरत पड़ने पर कुछ ही घंटों में पृथ्वी पर वापसी कराई जा सके
ISS का भविष्य क्या है?
- ISS को 2030 तक ऑपरेट करने की योजना
- इसके बाद इसे डिऑर्बिट किया जाएगा
- भविष्य में प्राइवेट स्पेस स्टेशन और चंद्रमा के लिए Gateway Station आएंगे
क्यों ISS की खबरें इतनी अहम होती हैं?
क्योंकि ISS:
- मानव अंतरिक्ष यात्रा का आधार है
- मंगल मिशन की तैयारी यहीं होती है
- अंतरिक्ष में इंसान की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ा रहा है















